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हार की सीख

हर हार को तू जीत ले  हर हार को हर जीत से।  कर मेहनत इस बार से , हर हार को तू जीत ले, हर हार को हर जीत से। जब असफलता मिलती है , मिलती है तब धिक्करिया पर जीत कर, हर हार की अब जीत से । परीक्षा का अर्थ हैं  सग्राल भी बिग्राल  भी, अब बिग्राल को सग्राल कर , अतीत की हर हार को हर जीत से ।। पथ की ठोकर लगती है जब, तब संभालता इंसान भी , हर सफल सकार की नीब होती है हार से । हर हार से तू सीख ले । हर हार की तू जीत से हर हार को तू जीत ले , हर हार को हर जीत से । : कविता का विस्तार करते हुए, हम हर हार की गहराई और उससे निकलने वाली सीख की विस्तृत व्याख्या कर सकते हैं। यह कविता न केवल हार की महत्ता पर जोर देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि किस तरह हार ही जीत की नींव बन सकती है।  जब हम किसी कार्य में असफल होते हैं, तो वह असफलता हमें कुछ न कुछ सिखाती है। यह सीख ही हमें अगली बार सफलता के करीब लाती है। जीवन में हर व्यक्ति को कभी न कभी असफलता का सामना करना पड़ता है, लेकिन जो व्यक्ति असफलता से हार मान जाता है, वह अपने जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाता। परंतु, जो व्यक्ति असफलता से सीख लेकर, उस...