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| भारत मालदीप सम्बन्ध |
भारत-मालदीव कूटनीतिक संबंधों का
भविष्य एवं चुनौतियां
अनुक्रमणिका
1. भारत-मालदीव संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
2. पर्यटन
उदयोग मे सहयोग और योगदान
3. भारत-मालदीव व्यापार और आर्थिक सहयोग
4. मालदीव के साथ भारत की “नेबरहुड फर्स्ट नीति
एवं कूटनीतिक संबंध
5. भविष्य की चुनौतियाँ और अवसर: भारत-मालदीव संबंधों
का मार्ग
भूमिका
भारत और मालदीव के
बीच का संबंध एक प्राचीन और महत्वपूर्ण इतिहास पर आधारित है। यह द्विपक्षीय संबंध दोनों
देशों के सामरिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक हितों में गहरे समाहित हैं। हिंद महासागर में
स्थित मालदीव अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण भारतीय उपमहाद्वीप के लिए विशेष महत्व रखता
है। यह लेख भारत और मालदीव के बीच संबंधों का विश्लेषण करते हुए उनके विभिन्न पहलुओं
पर प्रकाश डालेगा। भारत और मालदीव का संबंध प्राचीन काल से ही मजबूत रहा है। ऐतिहासिक
दृष्टि से दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता रहा है। भारतीय
उपमहाद्वीप से मालदीव को बौद्ध धर्म, भाषा, और संस्कृति का गहरा प्रभाव मिला है। मध्ययुगीन
समय में, मालदीव के लोग भारत से मसाले, कपड़े, और अन्य आवश्यक वस्त्रों का आयात करते
थे। मालदीव का भू-राजनीतिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह हिंद महासागर में स्थित है,
जहां से वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग गुजरते हैं। यह स्थान चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियों
की नजर में भी है। भारत के लिए, मालदीव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह भारत की समुद्री
सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। भारत और मालदीव के बीच आर्थिक
संबंध भी मजबूत हैं। भारत ने मालदीव को कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में आर्थिक सहायता
प्रदान की है। इसमें हवाई अड्डों, बंदरगाहों, और सड़कों का निर्माण शामिल है। 2021
में, भारत ने मालदीव को 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की थी। इसके
अलावा, भारत मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और मालदीव की अर्थव्यवस्था
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मालदीव की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ पर्यटन है,
और इसमें भारतीय पर्यटकों का बड़ा योगदान है। भारतीय पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़
रही है और यह मालदीव के पर्यटन उद्योग के लिए लाभदायक साबित हो रहा है। भारतीय पर्यटकों
की बढ़ती संख्या से मालदीव की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है। भारत और मालदीव
के बीच सांस्कृतिक संबंध भी बहुत गहरे हैं। भारतीय संस्कृति, विशेषकर बॉलीवुड फिल्में,
संगीत, और भोजन मालदीव में बहुत लोकप्रिय हैं। इसके अलावा, दोनों देशों के लोग धार्मिक,
सामाजिक, और सांस्कृतिक उत्सवों में भाग लेते हैं, जिससे आपसी संबंध और मजबूत होते
हैं।
भारत मालदीव को शिक्षा
और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करता है। मालदीव के छात्र
भारतीय विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। इसके अलावा, भारतीय
डॉक्टर और चिकित्सा पेशेवर मालदीव में चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं। भारत ने मालदीव
में अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं की स्थापना में भी सहयोग दिया है। भारत और मालदीव
के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और मालदीव के सुरक्षा
बलों के बीच नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास होते हैं। इसके अलावा, भारत ने मालदीव
की तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गश्ती नौकाओं और अन्य रक्षा उपकरणों की आपूर्ति
की है। 2018 में, मालदीव में आई राजनीतिक संकट के दौरान, भारत ने मालदीव की संप्रभुता
और स्थिरता का समर्थन किया था। मालदीव समुद्र तल से नीचा होने के कारण जलवायु परिवर्तन
और समुद्र स्तर में वृद्धि का सामना कर रहा है। भारत ने मालदीव को जलवायु परिवर्तन
से निपटने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके तहत, दोनों देशों के
बीच पर्यावरणीय सहयोग बढ़ाने और टिकाऊ विकास परियोजनाओं पर काम करने की दिशा में कई
समझौते किए गए हैं। भारत और मालदीव के संबंधों में कई चुनौतियाँ भी हैं। इनमें राजनीतिक
अस्थिरता, बाहरी हस्तक्षेप, और आंतरिक संघर्ष शामिल हैं। हालाँकि, दोनों देशों ने इन
चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत संवाद और सहयोग बनाए रखा है। भविष्य में, भारत और
मालदीव के बीच संबंधों को और मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं। दोनों देश शिक्षा,
स्वास्थ्य, व्यापार, और सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपने सहयोग को और बढ़ा सकते हैं।
साथ ही, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में भी नई साझेदारियां स्थापित
की जा सकती हैं। भारत और मालदीव के बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, और सामरिक
रूप से महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों ने समय-समय पर अपने संबंधों को और मजबूत किया है
और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है।
भारत-मालदीव
संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत और मालदीव के
बीच संबंधों का इतिहास 12वीं शताब्दी तक जाता है, जब मालदीव के व्यापारी और नाविक भारत
के तटीय क्षेत्रों के साथ व्यापार करते थे। 16वीं शताब्दी में, मालदीव ने पुर्तगालियों
से अपनी स्वतंत्रता हासिल करने में भारत की मदद ली। 19वीं शताब्दी में, ब्रिटिश शासन
के अधीन, भारत और मालदीव के बीच संबंध घनिष्ठ हुए, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
में वृद्धि हुई।
स्वतंत्रता के बाद
संबंध:
मालदीव ने 1965 में
स्वतंत्रता हासिल की और भारत ने नवनिर्मित राष्ट्र को तत्काल मान्यता दी। तब से, भारत
ने मालदीव को आर्थिक विकास, रक्षा और सुरक्षा सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाई है। 1988 में, मालदीव में भारतीय सैनिकों ने एक संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया,
जिसने देश में एक अलोकप्रिय सरकार को उखाड़ फेंका और एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित
सरकार की स्थापना में मदद की।
सामरिक साझेदारी:
हाल के वर्षों में,
भारत-मालदीव संबंध और भी मजबूत हुए हैं, खासकर रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में। भारत
मालदीव को रक्षा उपकरणों और प्रशिक्षण प्रदान करता है, और दोनों देश नियमित रूप से
संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। भारत मालदीव के तटों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण
भूमिका निभाता है, जो समुद्री डकैती और आतंकवाद के लिए एक संभावित लक्ष्य है।
अन्य क्षेत्रों में
सहयोग:
रक्षा और सुरक्षा
के अलावा, भारत और मालदीव व्यापार, निवेश, पर्यटन और विकास सहित कई अन्य क्षेत्रों
में भी सहयोग करते हैं। भारत मालदीव के लिए एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, और दोनों
देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। भारत ने मालदीव में बुनियादी ढांचे
के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसमें सड़कें, बंदरगाह और हवाई अड्डे
शामिल हैं। भारत-मालदीव संबंधों को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है, जिनमें
शामिल हैं:
चीन का बढ़ता प्रभाव:
चीन ने हाल के वर्षों में मालदीव में भारी निवेश किया है, जिससे क्षेत्र में उसके प्रभाव
में वृद्धि हुई है। इससे भारत के लिए रणनीतिक चिंता पैदा हो सकती है। मालदीव आतंकवाद
और उग्रवाद के प्रति संवेदनशील है। इस खतरे से निपटने के लिए भारत और मालदीव को मिलकर
काम करने की आवश्यकता होगी। मालदीव समुद्र तल से थोड़ा ऊपर स्थित एक द्वीपीय राष्ट्र
है। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का बढ़ता स्तर देश के लिए गंभीर खतरा है। भारत
को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मालदीव की मदद करने की आवश्यकता होगी।
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत-मालदीव संबंध मजबूत और टिकाऊ बने हुए हैं। दोनों देशों
के बीच घनिष्ठ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंध हैं, जो उनके संबंधों की नींव
बनाते है। भारत और मालदीव के बीच संबंधों का
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य सदियों पुराना है, जो व्यापार, संस्कृति और धर्म के माध्यम से
विकसित हुआ है। मालदीव हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप राष्ट्र है, जिसकी भौगोलिक
निकटता भारत के दक्षिणी तट से इसे एक स्वाभाविक सहयोगी बनाती है। मालदीप, आधुनिक भारत
का एक छोटा द्वीपीय राष्ट्र है जो भारतीय महासागर के समुद्री क्षेत्र में स्थित है।
इसका पूरा नाम “गणराज्य मालदीप” है। मालदीप की राजधानी माले है और यह एक आत्म-प्रशासित
सार्वभौमिक गणराज्य है। भूगोल मालदीप एक समूचा समूचा द्वीप है जो भारतीय महासागर में
फैला हुआ है। यह दक्षिण एशिया के अत्यंत दक्षिणी भाग में स्थित है। जनसंख्या मालदीप
की आधिकारिक भाषा धीवेही है और जनसंख्या लगभग 5 लाख के आसपास है। राजनीति मालदीप एक
गणराज्य है जो ब्रिटिश शासन के बाद 1965 में स्थापित हुआ। यहाँ पर प्रधानमंत्री की
भूमिका होती है और राष्ट्रपति सीधे चुने जाते हैं। अर्थव्यवस्था मालदीप की अर्थव्यवस्था
मुख्य रूप से पर्यटन, मानव संसाधन विकास, और नौकरीयों पर आधारित है। इसका अधिकतम आय
का स्रोत टूरिज्म है।
संरचना मालदीप का
एक बड़ा हिस्सा जल में स्थित है और यहाँ पर जीवन के लिए विशेष रूप से रिजॉर्ट्स और
आराम के स्थल हैं। यह अपनी सुंदर समुद्र तट, कोरल रीफ्स, और चिड़ियाघरों के लिए प्रसिद्ध
है। सांस्कृतिक विविधता मालदीप एक संयुक्त संस्कृति का घर है, जिसमें धार्मिक संस्कृति,
भाषा, और राजनीति का मेल है। यहाँ पर विभिन्न धर्मों के मंदिर और श्रीनगर हैं। मालदीप
अपने प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, और पर्यटन के संभावनाओं के लिए
जाना जाता है। यह एक सामूहिक दृश्य और प्रकृति के आनंद का अनुभव करने के लिए एक पसंदीदा
स्थल है।
प्राचीन और मध्यकालीन
संबंध
प्राचीन समय में,
मालदीव भारत के तटीय राज्यों, विशेष रूप से केरल और तमिलनाडु के साथ व्यापारिक संबंधों
में था। मालदीव के लोग भारतीय उपमहाद्वीप से चावल, कपड़ा और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्राप्त
करते थे, जबकि वे भारत को मछली और कोकोनट उत्पाद निर्यात करते थे। सांस्कृतिक दृष्टिकोण
से, हिंदू धर्म और बाद में बौद्ध धर्म का प्रभाव मालदीव में स्पष्ट रूप से देखा जा
सकता है। मध्यकालीन काल में, इस्लाम का प्रसार हुआ और 12वीं शताब्दी में मालदीव एक
इस्लामी राष्ट्र बन गया।
औपनिवेशिक युग
औपनिवेशिक युग में,
मालदीव ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन आ गया, जबकि भारत भी ब्रिटिश उपनिवेश था। इस अवधि
में दोनों देशों के बीच औपचारिक संबंध कम थे, लेकिन सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क
जारी रहे। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, मालदीव के साथ संबंधों को नए सिरे से
स्थापित करने का प्रयास किया गया।
स्वतंत्रता और प्रारंभिक
द्विपक्षीय संबंध मालदीव ने 1965 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त की, और इसके तुरंत
बाद भारत ने मालदीव को मान्यता दी। दोनों देशों ने औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित
किए और 1972 में मालदीव में भारतीय दूतावास खोला गया। यह संबंध दोनों देशों के लिए
महत्वपूर्ण था, क्योंकि भारत मालदीव के लिए एक प्रमुख सहयोगी और सुरक्षा प्रदाता बना
रहा।
1988 का तख्तापलट
और भारतीय हस्तक्षेप
1988 में, मालदीव
में एक तख्तापलट का प्रयास हुआ, जिसे भारतीय सेना ने “ऑपरेशन कैक्टस” के तहत विफल कर
दिया। भारत की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने मालदीव की सरकार को स्थिरता प्रदान की
और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत किया। इस घटना ने भारत को मालदीव के लिए
एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित किया।
1990 के दशक और
2000 के दशक: आर्थिक और रणनीतिक सहयोग 1990 और 2000 के दशक में, भारत और मालदीव ने
अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत किया। दोनों देशों ने व्यापार, पर्यटन,
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग किया। मालदीव भारतीय पर्यटकों
के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य बन गया, और भारतीय व्यवसायों ने मालदीव में निवेश किया।
इसी दौरान, भारत ने मालदीव की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में भी महत्वपूर्ण
योगदान दिया। हाल के वर्षों में, भारत और मालदीव के बीच संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव
देखने को मिले हैं, लेकिन दोनों देशों ने आपसी सहयोग को बनाए रखा है। भारत ने मालदीव
की आर्थिक और सामाजिक विकास में सहायता प्रदान की है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास,
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार शामिल हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन और समुद्री
सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों ने संयुक्त रूप से काम किया है। भारत और मालदीव
के बीच संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य दिखाता है कि दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग,
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रणनीतिक साझेदारी कितनी महत्वपूर्ण रही है। आज, दोनों देश
एक दूसरे के साथ घनिष्ठ सहयोग बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता
और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में, भारत और मालदीव के बीच संबंध और
भी मजबूत होने की संभावना है, जिससे दोनों देशों को लाभ होगाभारत और मालदीप राजनयिक
संबंधों की स्थापना और विकास भारत और मालदीप के बीच राजनयिक संबंधों का इतिहास लम्बा
और समृद्ध है। दोनों देशों के बीच समर्थन, सहयोग, और साझेदारी के कई क्षेत्रों में
विकास हुआ है। इस लेख में, हम भारत और मालदीप के राजनयिक संबंधों के महत्व, संबंधों
के इतिहास, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग, और भविष्य के दिशा-निर्देश पर ध्यान देंगे।
भारत और मालदीप के
राजनयिक संबंधों का महत्व विभिन्न क्षेत्रों में है। यह दोनों देशों के लोगों के बीच
साझेदारी, व्यापार, संगठन, और सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देता है। मालदीप एक छोटा
द्वीपीय राष्ट्र होने के बावजूद अपने रणनीतिक, राजनीतिक, और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
में महत्वपूर्ण है।
भारत और मालदीप के
बीच राजनयिक संबंधों का इतिहास बहुत पुराना है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक
रूप से गहरे संबंध हैं। भारत ने मालदीप को समर्थन और सहायता प्रदान की है, जिसने मालदीप
की विकास और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत और मालदीप ने
विभिन्न संगठनों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ साझेदारी की है। वे संयुक्त राष्ट्र,
सार्क, और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सहयोग करते हैं। इससे
दोनों देशों के बीच सामरिक सुरक्षा, व्यापार, और साझेदारी को बढ़ावा मिलता है।
भारत और मालदीप के
बीच व्यापार महत्वपूर्ण है। वे अपने बीच के व्यापार और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग
करते हैं। भारत ने मालदीप को विभिन्न आर्थिक सहायता प्रदान की है, जिसने मालदीप की
अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। भारत और मालदीप के बीच संबंधों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी,
साझा विकास, पर्यावरण, और सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में भी सहयोग होता है।
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.चतुर्वेदी एस. (2014) भारत की दक्षिण
की ओर देखो नीति और मालदीव। नई दिल्ली: केडब्ल्यू पब्लिशर्स। पृष्ठ संख्या 33 |
भारत
और मालदीव: व्यापार और आर्थिक सहयोग
भारत और मालदीव के
बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग गहरे और बहुपक्षीय संबंधों का हिस्सा है, जो दोनों देशों
की आर्थिक स्थिरता और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस आलेख में हम भारत
और मालदीव के व्यापारिक और आर्थिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं, उनके महत्व, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि,
प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग, और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। भारत और मालदीव
के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों की जड़ें ऐतिहासिक रूप से गहरी हैं। दोनों देशों
के बीच प्राचीन समय से ही समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता रहा है।
मालदीव की भौगोलिक स्थिति ने इसे भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया के व्यापार मार्गों
के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया था।गया 1965 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद,
मालदीव और भारत ने औपचारिक रूप से अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की। इसके बाद से,
दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न समझौतों
और पहलियों पर काम किया गया।
व्यापारिक संबंधों
का विकास
भारत और मालदीव के
बीच व्यापारिक संबंधों का विकास तेजी से हो रहा है। मालदीव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप
से पर्यटन, मत्स्य पालन, और सेवा क्षेत्रों पर निर्भर है, जबकि भारत एक कृषि और उद्योग
प्रधान देश है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन और सहयोग को बढ़ाने के लिए कई
उपाय किए गए हैं।
1. व्यापारिक संतुलनसंतुल
भारत मालदीव को मुख्य रूप से खाद्य पदार्थ, अनाज,
वस्त्र, दवाएं, और निर्माण सामग्री निर्यात करता है। मालदीप् भारत को मछली और समुद्री
उत्पाद, पर्यटन सेवाएं, और कुछ हस्तशिल्प वस्तुएं निर्यात करता है।
2. व्यापारिक समझौते
दोनों देशों ने द्विपक्षीय
व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे व्यापारिक बाधाओं को कम किया जा सके
और व्यापार को सुगम बनाया जा सके। भारत और मालदीव के बीच व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित
करने के लिए संयुक्त आर्थिक और व्यापारिक आयोग की स्थापना की गई है।
आर्थिक सहयोग के
प्रमुख क्षेत्र
भारत और मालदीव के
बीच आर्थिक सहयोग के कई प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनमें पर्यटन, बुनियादी ढांचे का विकास,
स्वास्थ्य, शिक्षा, और प्रौद्योगिकी शामिल हैं।
मालदीव का पर्यटन
उद्योग उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत से हजारों पर्यटक
प्रतिवर्ष मालदीव की यात्रा करते हैं, जिससे मालदीव की अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एयरलाइंस सेवाओं का विस्तार किया
गया है, जिससे यात्रा और पर्यटन को सुगम बनाया जा सके।।
भारत ने मालदीव के
बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें सड़कों, पुलों, बंदरगाहों,
और हवाई अड्डों के निर्माण और मरम्मत में सहायता शामिल है । 2018 में, भारत ने मालदीव
को 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे मालदीव के बुनियादी
ढांचे के परियोजनाओं को बढ़ावा मिला।
स्वास्थ्य क्षेत्र
में सहयोग के तहत, भारत ने मालदीव में अस्पतालों, चिकित्सा सुविधाओं, और चिकित्सा उपकरणों
की आपूर्ति में सहायता प्रदान की है। भारत ने मालदीव के चिकित्सा कर्मचारियों को प्रशिक्षण
और शिक्षा में भी समर्थन दिया है, जिससे मालदीव की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ।
भारत और मालदीव के
बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग महत्वपूर्ण है। भारतीय सरकार ने मालदीव के छात्रों
के लिए छात्रवृत्तियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था की है। भारतीय शैक्षिक
संस्थानों में मालदीव के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
भारत ने मालदीव में
डिजिटल तकनीक और संचार के क्षेत्र में सहयोग प्रदान किया है। इसमें इंटरनेट कनेक्टिविटी,
साइबर सुरक्षा, और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग शामिल है । दोनों देशों के बीच
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समझौते हुए हैं, जिससे मालदीव की डिजिटल
क्षमताओं में सुधार हुआ है।
सामरिक और सुरक्षा
सहयोग
भारत और मालदीव के
बीच सामरिक और सुरक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक स्थिरता
बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ा है।
भारतीय नौसेना और
मालदीव के समुद्री सुरक्षा बल के बीच नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
किए जाते हैं। भारत ने मालदीव की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नौसेना
उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान किया है।
दोनों देशों के बीच
आतंकवाद निरोध के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है, जिसमें खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान
और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई शामिल है। भारत ने मालदीव की सुरक्षा
एजेंसियों को आतंकवाद निरोध के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की है।
भारत और मालदीव के
बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग के भविष्य में कई संभावनाएँ हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों
को और मजबूत करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
दोनों देशों के बीच
व्यापारिक अवसरों का विस्तार करने के लिए और अधिक व्यापारिक समझौतों और पहलियों को
लागू किया जा सकता है। छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए विशेष व्यापारिक योजनाएँ
और सहायता कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं।
भारत और मालदीव के
बीच निवेश और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए निवेशक सम्मेलन और व्यापारिक मिशनों
का आयोजन किया जा सकता है। दोनों देशों के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक
क्षेत्रों (SEZs) और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन योजनाओं का विकास किया जा सकता है।
भारत और मालदीव के
बीच सामुदायिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान
और कला कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक
संबंधों को मजबूत करने के लिए पर्यटन और यात्रा के क्षेत्र में और अधिक सहयोग किया
जा सकता है।
भारत और मालदीव के
बीच तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में और अधिक पहलियों को लागू किया जा सकता है, जिसमें
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण, और अनुसंधान शामिल है। दोनों देशों के बीच साइबर
सुरक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं का विकास किया जा
सकता है।
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पंत, एच. वी. (2019)। भारत और विश्व: भारतीय राजनयिकों
की नज़र से नई दिल्ली: हार्पर
कॉलिन्स इंडिया। (इसमें मालदीव के साथ भारत के राजनयिक संबंधों पर चर्चा शामिल है।
पृष्ठ संख्या 28 |
पर्यटन
उद्योग में सहयोग और योगदान
भारत और मालदीव के
बीच पर्यटन उद्योग में सहयोग और योगदान एक महत्वपूर्ण और समृद्ध क्षेत्र है जो दोनों
देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाता है। पर्यटन क्षेत्र में यह सहयोग न केवल आर्थिक
विकास में सहायक होता है, बल्कि दोनों देशों की सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को भी
मजबूत करता है। इस लेख में हम भारत और मालदीव के बीच पर्यटन उद्योग में सहयोग और योगदान
के विभिन्न पहलुओं, उनके महत्व, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग, और
भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। भारत और मालदीव के बीच पर्यटन उद्योग में सहयोग
की शुरुआत ऐतिहासिक रूप से हुई। मालदीव, अपने अद्वितीय समुद्री सौंदर्य और शांतिपूर्ण
वातावरण के कारण, हमेशा से ही भारतीय पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा
है। वहीं, भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक स्थल, और प्राकृतिक सौंदर्य भी
मालदीव के पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं। 1965 में मालदीव की स्वतंत्रता के बाद,
दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंधों को मजबूत किया और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग
को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न समझौतों और पहलियों पर काम किया। इस सहयोग ने दोनों
देशों के बीच पर्यटकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया और पर्यटन उद्योग को एक नया आयाम
दिया।
पर्यटन अवसंरचना भारत ने मालदीव के पर्यटन अवसंरचना
के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय कंपनियों ने मालदीव में होटल, रिजॉर्ट,
और अन्य पर्यटन सुविधाओं के निर्माण में निवेश किया है।
भारत ने मालदीव के
पर्यटन उद्योग को वित्तीय सहायता और निवेश प्रदान किया है, जिससे मालदीव की पर्यटन
सेवाओं में सुधार हुआ है।
दोनों देशों ने संयुक्त
पर्यटन पैकेज और अभियानों का आयोजन किया है, जिससे पर्यटकों को दोनों देशों के प्रमुख
पर्यटन स्थलों का दौरा करने का मौका मिलता है।
भारत और मालदीव के
पर्यटन बोर्ड ने मिलकर दोनों देशों के पर्यटन स्थलों के प्रचार और विपणन के लिए अभियान
चलाए हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।
भारत और मालदीव ने
पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए संस्थानों की स्थापना की
है। भारतीय संस्थानों में मालदीव के छात्रों को पर्यटन प्रबंधन और आतिथ्य सेवाओं में
प्रशिक्षण दिया जाता है।
दोनों देशों के बीच
नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पर्यटन उद्योग के पेशेवरों
को प्रशिक्षण और विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
भारत और मालदीव के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उत्सवों का आयोजन किया जाता है, जिससे
दोनों देशों की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और संवर्धित किया जा सके।
पर्यटन उद्योग में
सहयोग के तहत दोनों देशों के बीच सामाजिक परियोजनाओं का भी विकास किया गया है, जिसमें
समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय समुदायों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
पर्यटन उद्योग में योगदान
पर्यटन उद्योग में
सहयोग के कारण दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को कई प्रकार से लाभ हुआ है। यहाँ कुछ
महत्वपूर्ण योगदानों का विवरण दिया गया है:
आर्थिक विकास
राजस्व : पर्यटन उद्योग दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण
राजस्व स्रोत है। भारत और मालदीव के बीच सहयोग के कारण पर्यटन से होने वाली आय में
वृद्धि हुई है, जिससे आर्थिक स्थिरता और विकास हुआ है।
रोजगार सृजन : पर्यटन उद्योग में सहयोग के कारण दोनों देशों में
रोजगार के अवसर बढ़े हैं। होटल, रिजॉर्ट, और पर्यटन सेवाओं में काम करने वाले लोगों
के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।
पर्यटन के माध्यम
से दोनों देशों की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और संवर्धित किया जा रहा है। पर्यटक
भारतीय और मालदीव की संस्कृति, कला, और परंपराओं का अनुभव कर सकते हैं, जिससे सांस्कृतिक
जागरूकता बढ़ती है।है
पर्यटन उद्योग स्थानीय
कला और शिल्प को बढ़ावा देता है। पर्यटकों के माध्यम से स्थानीय कलाकार और शिल्पकार
अपनी कलाओं और उत्पादों को प्रदर्शित और बेच सकते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ होता
है।
पर्यावरण संरक्षण पर्यटन उद्योग में सहयोग के कारण दोनों देशों ने
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पर्यावरणीय स्थिरता को सुनिश्चित
करने के लिए विभिन्न पहलियाँ लागू की गई हैं, जिसमें सतत पर्यटन और पर्यावरणीय शिक्षा
शामिल है।
स्थायी पर्यटन : दोनों देशों ने स्थायी पर्यटन को बढ़ावा देने के
लिए नीतियाँ और योजनाएँ बनाई हैं, जिससे पर्यावरण पर पर्यटन का नकारात्मक प्रभाव कम
हो सके।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
राजनयिक संबंध : पर्यटन उद्योग में सहयोग के कारण भारत और मालदीव
के राजनयिक संबंध भी मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच पर्यटन के माध्यम से राजनीतिक
और आर्थिक सहयोग में वृद्धि हुई है।
वैश्विक पहचान :पर्यटन उद्योग में सहयोग के कारण दोनों देशों की
वैश्विक पहचान भी बढ़ी है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के माध्यम से भारत और मालदीव ने विश्व
में अपनी पहचान बनाई है। पर्यटन उद्योग में सहयोग के लिए कई चुनौतियाँ भी होती हैं,
जैसे आर्थिक अस्थिरता, सुरक्षा समस्याएँ, और प्राकृतिक आपदाएँ। लेकिन इन चुनौतियों
के बावजूद, भारत और मालदीव के बीच पर्यटन उद्योग में सहयोग के लिए कई संभावनाएँ हैं।
तकनीकी नवाचार के
माध्यम से पर्यटन सेवाओं का संवर्धन किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच डिजिटल पर्यटन
सेवाओं का विकास और प्रौद्योगिकी के उपयोग से पर्यटकों को अधिक सुविधाएँ प्रदान की
जा सकती हैं।स्मार्ट पर्यटन पहलियों के माध्यम से पर्यटकों को आधुनिक और सुविधाजनक
सेवाएँ प्रदान की जा सकती हैं, जिससे पर्यटन का अनुभव और भी बेहतर हो सके।
पर्यटन के संवर्धन
के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग से नए पर्यटन स्थलों का विकास किया जा सकता है। इससे
पर्यटकों के लिए और अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे और पर्यटन उद्योग में वृद्धि होगी पर्यटन
प्रचार दोनों देशों के पर्यटन स्थलों के प्रचार और विपणन के लिए और अधिक अभियान चलाए
जा सकते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। भारत और मालदीव
के बीच पर्यटन उद्योग में सहयोग और योगदान का महत्व अत्यधिक है। यह न केवल दोनों देशों
की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा में भी
महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भविष्य में, भारत और मालदीव के बीच पर्यटन उद्योग में
सहयोग और बढ़ने की संभावना है, जो दोनों देशों के विकास और समृद्धि के लिए लाभकारी
होगा। पर्यटन के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, संवर्धन, और सुरक्षा उपायों के माध्यम
से, दोनों देश अपनी पर्यटन सेवाओं को और अधिक प्रभावी और आकर्षक बना सकते हैं।
मालदीव के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की कोशिश में भारत:
मुइज्जू बोले- इससे व्यापार आसान होगा; 2023 में मालदीव का सबसे बड़ा ट्रेडिंग
पार्टनर था भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू आखिरी बार पिछले साल
दिसंबर में दुबई में हुए क्लाइमेट समिट में मिले थे।
भारत मालदीव के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) शुरू करने की कोशिश में
जुटा है। मालदीव के आर्थिक विकास मंत्री मोहम्मद सईद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान
शनिवार को इसकी जानकारी दी। सईद ने कहा, "राष्ट्रपति मुइज्जू ने सभी देशों को
यह मौका दिया है। सरकार ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ समझौता करना चाहती है, जिससे
ट्रेड एक्टीविटीज को आसान बनाया जा सके।"
भारत और मालदीव के बीच पहले से ही साउथ एशिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
(SAFTA) लागू है। 1981 के भारत और मालदीव व्यापार समझौते के तहत, जरूरी सामानों के
निर्यात को लेकर नियम बनाए गए थे। मालदीव में मौजूद भारतीय हाई कमिशन के रिकॉर्ड्स
के मुताबिक, पिछले साल भारत मालदीव का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था।
साल 2021 में पहली बार दोनों देशों के बीच व्यापार 25 हजार करोड़ के पार
गया था। वहीं इसके अगले साल 2022 में दोनों देशों के बीच ट्रेड 41 हजार करोड़ से ज्यादा
रिकॉर्ड किया गया। भारत मालदीव से मुख्य तौर पर स्क्रैप मेटल इम्पोर्ट करता है। वहीं
मालदीव हमसे कई दवाइयां, सीमेंट, रडार अपैरेटस समेत खाने-पीने का सामान जैसे चावल,
मसाले, फल-सब्जी इम्पोर्ट करता है।
इससे पहले अप्रैल में भारत ने घोषणा की थी कि वह मालदीव को जरूरी सामान
भेजता रहेगा। मालदीव में मौजूद भारतीय हाई कमीशन ने बताया था कि मुइज्जू सरकार की अपील
पर भारत 2024-25 के लिए मालदीव में जरूरी सामानों का एक्सपोर्ट जारी रखेगा। इस दौरान
सामान की जो मात्रा तय की गई है वो 1981 के बाद सबसे ज्यादा होगी।
दरअसल, भारत सरकार ने देश में चावल, चीनी और प्याज जैसी रोजमर्रा की चीजों
के दाम काबू में रखने के लिए इनके एक्सपोर्ट पर रोक लगा रखी है। इस बीच सरकार ने घोषणा
की थी कि प्रतिबंधों के बावजूद मालदीव में इन सामानों की सप्लाई जारी रहेगी।
हाई कमीशन के मुताबिक, कंस्ट्रक्शन सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली नदी
की रेत और पत्थरों का 10-10 लाख मीट्रिक टन एक्सपोर्ट किया जाएगा। इसमें 25% की बढ़ोतरी
हुई है। इसके अलावा अंडे, आलू, आटा और दाल के कोटे को भी 5% बढ़ाया गया है। यह फैसला
भारत की पड़ोसियों को प्राथमिकता देने वाली पॉलिसी के तहत किया गया था।
क्या होता है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल देशों के बीच व्यापार को सरल बनाने के
लिए किया जाता है। FTA के तहत दो देशों के बीच आयात-निर्यात पर सीमा शुल्क और सब्सिडी
को सरल बनाया जाता है। टैरिफ कटौती से दोनों देशों के खरीदारों को फायदा होता है। इससे
कम कीमतों में सामान बाजार में उपलब्ध होते हैं।
जिन 2 देशों के बीच यह एग्रीमेंट साइन होता है, वहां सामान की उत्पादन
लागत कम हो जाी है। इससे व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलती है और अर्थव्यवस्था तेजी
से मजबूत होती है।
'इंडिया आउट' कैंपेन के साथ शुरू हुआ भारत-मालदीव विवाद
भारत-मालदीव के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चर्चा ऐसे समय में हो रही
है, जब पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। मालदीव में पिछले
साल राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपने कैंपेन में मोहम्मद मुइज्जू ने 'इंडिया आउट'
का नारा दिया।
इसे लेकर उन्होंने कई रैलियां भी कीं। मुइज्जू ने वादा किया कि वे राष्ट्रपति
बने तो देश से भारतीय सैनिकों को हटा देंगे। उन्होंने इसी के दम पर चुनाव जीता। 17
नवंबर 2023 को मालदीव के नए राष्ट्रपति और चीन समर्थक कहे जाने वाले मुइज्जू ने शपथ
ली थी। इसके बाद से भारत और मालदीव के रिश्तों में खटास आ गई।
नतीजा ये हुआ कि मालदीव ने वहां तैनात 88 भारतीय सैनिकों को निकालने का
फैसला किया। इसके लिए 10 मई की डेडलाइन रखी गई थी, जिसके बाद भारत ने मालदीव से अपने
सैनिकों को वापस बुला लिया। ये दो हेलिकॉप्टर और एक एयरक्राफ्ट का ऑपरेशन संभालते रहे
थे।
आमतौर पर मालदीव में इन हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल रेस्क्यू या सरकारी कामों
में किया जाता है। दूसरी तरफ मालदीव से बिगड़ते रिश्तों के बीच प्रधानमंत्री मोदी जनवरी
में लक्षदीप के दौरे पर गए और उन्होंने लोगों से घूमने के लिए वहां आने की अपील की।
PM मोदी पर विवादित बयान से तनाव बढ़ा
इस पर मालदीव के कुछ मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत के खिलाफ
आपत्तिजनक टिप्पणी की। पलटवार करते हुए कई भारतीय टूरिज्म कंपनियों और लोगों ने मालदीव
को बॉयकॉट करना शुरू कर दिया। इससे मालदीव जाने वाले भारतीय टूरिस्टों की संख्या
में तेजी से गिरावट आई।
इसी दौरान मालदीव के राष्ट्रपति चीन के दौरे पर गए और वापस लौटकर कहा कि
कोई देश उन्हें धमका नहीं सकता। मुइज्जू ने मालदीव का समर्थन करने के लिए चीन के लोगों
से उनके देश घूमने आने की अपील की। इसके बाद मालदीव ने भारत के साथ हुए हाइड्रोग्राफिक
सर्वे एग्रीमेंट को भी खत्म कर दिया।
|
रमेश, जे. (2006). मेकिंग सेंस ऑफ
चिंदिया: रिफ्लेक्शन्स ऑन चाइना एंड इंडिया। नई दिल्ली: इंडिया रिसर्च प्रेस. (जबकि मुख्य रूप से
चीन और भारत पर केंद्रित, इसमें मालदीव
से जुड़ी क्षेत्रीय गतिशीलता की अंतर्दृष्टि शामिल है। पृष्ठ संख्या 61 |
मालदीव के साथ भारत की
“नेबरहुड फर्स्ट नीति एवं कूटनीतिक संबंध
भारत की विदेश नीति
में “नेबरहुड फर्स्ट” नीति का एक महत्वपूर्ण स्थान है, जिसका उद्देश्य पड़ोसी देशों
के साथ मजबूत और सहयोगी संबंध स्थापित करना है। इस नीति के तहत, भारत अपने पड़ोसी देशों
के साथ आर्थिक, राजनीतिक, और सांस्कृतिक संबंधों को प्राथमिकता देता है। मालदीव, भारत
का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है, जिसके साथ भारत ने “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत मजबूत
और बहुआयामी संबंध स्थापित किए हैं। भारत और मालदीव के बीच संबंधों की जड़ें ऐतिहासिक
रूप से गहरी हैं। प्राचीन समय से ही दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक
आदान-प्रदान होता रहा है। मालदीव की भौगोलिक स्थिति ने इसे भारतीय उपमहाद्वीप के साथ
जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1965 में मालदीव की स्वतंत्रता के बाद, दोनों
देशों ने अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा
दिया।
“नेबरहुड
फर्स्ट” नीति का उद्देश्य
“नेबरहुड फर्स्ट”
नीति का मुख्य उद्देश्य भारत के पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और सद्भावना के आधार पर
संबंधों को मजबूत करना है। इस नीति के तहत भारत अपने पड़ोसी देशों की सुरक्षा, विकास,
और स्थिरता में योगदान देने के लिए विभिन्न उपाय करता है। मालदीव के साथ इस नीति का
प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
राजनयिक संबंधों
का सुदृढ़ीकरण: दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को और मजबूत करना और उच्च स्तरीय
यात्राओं और संवाद को बढ़ावा देना।
आर्थिक सहयोग का
विस्तार: व्यापार, निवेश, और आर्थिक सहयोग के माध्यम से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं
को मजबूत करना।
सुरक्षा सहयोग: क्षेत्रीय
सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाने के लिए सैन्य और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना।
सांस्कृतिक और सामाजिक
संबंधों का संवर्धन: सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक संबंधों को बढ़ावा देना।
भारत और मालदीव के
बीच आर्थिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। भारत ने मालदीव की आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई है। यहाँ कुछ प्रमुख क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग का विवरण दिया गया है:
भारत ने मालदीव को
विभिन्न आर्थिक परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 2018 में, भारत ने
मालदीव को 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की थी, जिसका उद्देश्य
बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं को बढ़ावा देना था।
भारत और मालदीव के
बीच व्यापारिक संबंध तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत मालदीव को खाद्य पदार्थ, निर्माण सामग्री,
और अन्य वस्त्र निर्यात करता है, जबकि मालदीव भारत को मछली और समुद्री उत्पाद निर्यात
करता है।
भारतीय कंपनियों
ने मालदीव में होटल, रिजॉर्ट, और अन्य पर्यटन सुविधाओं में निवेश किया है, जिससे मालदीव
के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिला है।
पर्यटन मालदीव की
अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और भारत से हजारों पर्यटक प्रतिवर्ष मालदीव
की यात्रा करते हैं। दोनों देशों के बीच पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने
के लिए एयरलाइंस सेवाओं का विस्तार किया गया है।
भारत और मालदीव के
बीच सुरक्षा सहयोग का क्षेत्र भी महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक स्थिरता
बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ा है। यहाँ कुछ प्रमुख पहलुओं
का विवरण दिया गया है:
भारतीय नौसेना और
मालदीव के समुद्री सुरक्षा बल के बीच नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
किए जाते हैं। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और सामरिक स्थिरता को बढ़ाना है।
भारत ने मालदीव की
समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नौसेना उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान किया
है।
दोनों देशों के बीच
आतंकवाद निरोध के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है, जिसमें खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान
और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई शामिल है। भारत ने मालदीव की सुरक्षा
एजेंसियों को आतंकवाद निरोध के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की है।
सांस्कृतिक और सामाजिक
सहयोग के तहत, भारत और मालदीव ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शिक्षा, और स्वास्थ्य के
क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहलियाँ की हैं। यहाँ कुछ प्रमुख पहलुओं का विवरण दिया
गया है:
भारत ने मालदीव के
छात्रों के लिए छात्रवृत्तियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था की है। भारतीय
शैक्षिक संस्थानों में मालदीव के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए गए
हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग से मालदीव के शैक्षिक मानकों
में सुधार हुआ है।
स्वास्थ्य क्षेत्र
में सहयोग के तहत, भारत ने मालदीव में अस्पतालों, चिकित्सा सुविधाओं, और चिकित्सा उपकरणों
की आपूर्ति में सहायता प्रदान की है।
भारतीय चिकित्सा
विशेषज्ञों ने मालदीव में चिकित्सा शिविर और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की हैं, जिससे
मालदीव की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।
भारत और मालदीव के
बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे
दोनों देशों की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और संवर्धित किया जा सके।
दोनों देशों के बीच
सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कलाकारों, संगीतकारों, और साहित्यकारों का
आदान-प्रदान किया जाता है मालदीव के साथ “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत सहयोग के लिए
कई चुनौतियाँ भी होती हैं, जैसे आर्थिक अस्थिरता, सुरक्षा समस्याएँ, और प्राकृतिक आपदाएँ।
लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद, भारत और मालदीव के बीच सहयोग के लिए कई संभावनाएँ हैं।
दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में और अधिक पहलियों को लागू किया जा सकता
है, जिसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रशिक्षण, और अनुसंधान शामिल है। दोनों देशों
के बीच साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं का
विकास किया जा सकता है।
भारत और मालदीव के
बीच नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ तलाशने के लिए संयुक्त परियोजनाओं का विकास
किया जा सकता है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, और कृषि विकास शामिल हो सकते हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा
को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इसमें आतंकवाद निरोध, समुद्री सुरक्षा, और सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग शामिल
है। सुरक्षा सेवाओं का सहयोग पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और पर्यटन उद्योग
को बढ़ावा देता है।
|
राजन, डी.एस. (2018) इंडिया एंड इट्स
नेबरहुड: ए न्यू लुक एट स्ट्रैटेजिक टाईज़ एंड पावर पॉलिटिक्स केडब्ल्यू पब्लिशर्स।
(मालदीव सहित अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों का विश्लेषण करता
है। पृष्ठ संख्या 49 |
भविष्य
की चुनौतियाँ और अवसर: भारत-मालदीव संबंधों का मार्ग
भारत और मालदीव के
बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से घनिष्ठ रहे हैं। दोनों देशों के
बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, जो रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और विकास सहित कई क्षेत्रों
में सहयोग पर आधारित है। हालांकि, भविष्य में भारत-मालदीव संबंधों को कुछ चुनौतियों
का सामना करना पड़ सकता है। इनमें से कुछ प्रमुख चुनौतियां निम्नलिखित हैं:
चीन का बढ़ता प्रभाव:
चीन ने हाल के वर्षों में मालदीव में भारी निवेश किया है, जिससे क्षेत्र में उसके प्रभाव
में वृद्धि हुई है। इससे भारत के लिए रणनीतिक चिंता पैदा हो सकती है।
मालदीव आतंकवाद और
उग्रवाद के प्रति संवेदनशील है। इस खतरे से निपटने के लिए भारत और मालदीव को मिलकर
काम करने की आवश्यकता होगी। मालदीव समुद्र तल से थोड़ा ऊपर स्थित एक द्वीपीय राष्ट्र
है। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का बढ़ता स्तर देश के लिए गंभीर खतरा है। भारत
को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मालदीव की मदद करने की आवश्यकता होगी।
मालदीव एक छोटी अर्थव्यवस्था
वाला देश है। देश को टिकाऊ आर्थिक विकास हासिल करने के लिए भारत की सहायता की आवश्यकता
होगी।
इन चुनौतियों के
बावजूद, भारत-मालदीव संबंधों में कई अवसर भी हैं। इनमें से कुछ अवसरों में शामिल हैं:
भारत और मालदीव के
बीच व्यापार और निवेश में वृद्धि की काफी संभावना है। दोनों देशों को इस क्षेत्र में
सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
मालदीव एक लोकप्रिय
पर्यटन स्थल है। भारत से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की काफी संभावना है। दोनों
देशों को पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
भारत और मालदीव के
बीच समृद्ध सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों देशों को सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा
देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
रक्षा और सुरक्षा:
भारत और मालदीव के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग मजबूत है। दोनों देशों को इस क्षेत्र
में सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
भारत और मालदीव के
बीच संबंध मजबूत और महत्वपूर्ण हैं। भविष्य में इन संबंधों को और मजबूत करने के लिए
दोनों देशों को कई चुनौतियों का सामना करना होगा और कई अवसरों का लाभ उठाना होगा।
भारत और मालदीव के
बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय मुलाकातें
और बातचीत जारी रखना महत्वपूर्ण है।
दोनों देशों को विभिन्न
क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए विशिष्ट समझौतों और कार्य योजनाओं पर हस्ताक्षर
करने चाहिए। भारत को मालदीव को क्षमता निर्माण और विकासात्मक सहायता प्रदान करना जारी
रखना चाहिए। दोनों देशों को लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए,
जैसे कि छात्र और पर्यटन आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से घनिष्ठ एवं मैत्रीपूर्ण
पड़ोसियों के रूप में भारत और मालदीव के बीच जातीय, भाषायी, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं
वाणिज्यिक संपर्क हैं जिनकी जड़ें बहुत पुरानी हैं तथा दोनों देशों के बीच संबंध मधुर
एवं बहुआयामी हैं। 1965 में मालदीव की आजादी के बाद उसे मान्यता प्रदान करने और इस
देश के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले देशों में भारत का नाम शामिल है।
भारत ने 1972 में माले में अपना मिशन स्थापित किया।
राजनीतिक संबंध
सभी स्तरों पर नियमित
संपर्क के माध्यम से द्विपक्षीय संबंध सुदृढ हुए हैं। जब से राजनयिक संबंध स्थापित
हुए हैं तब से भारत के लगभग सभी प्रधानमंत्रियों ने मालदीव का दौरा किया है। मालदीव
की ओर से, पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम तथा पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने
राष्ट्रपति रहने के दौरान कई बार भारत का दौरा किया। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने
एक उच्च स्तरीय शिष्टमंडल के साथ एक राजकीय यात्रा पर 1 से 4 जनवरी, 2014 के दौरान
भारत का दौरा किया, जो उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा थी। उन्होंने मई 2014 में प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भी भाग लिया।
उच्च स्तर पर मंत्री
स्तरीय यात्राएं भी नियमित रूप से होती रहती हैं। भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा
स्वराज ने नवंबर 2014 और अक्टूबर 2015 में मालदीव का दौरा किया। स्वास्थ्य मंत्री श्री
जे पी नड्डा ने जुलाई 2015 में स्वर्ण जयंती स्वतंत्रता समारोह में भाग लेने के लिए
प्रधानमंत्री के विशेष दूत के रूप में मालदीव का दौरा किया। पर्यटन, संस्कृति और नागरिक
उड्डयन राज्य मंत्री डॉ महेश शर्मा ने भी यू एन ड्ब्ल्यू टी ओ क्षेत्रीय मंत्री स्तरीय
सम्मेलन में भाग लेने के लिए 03-05 जून, 2015 मालदीव का दौरा किया। मालदीव की ओर से
मंत्री स्तर पर हाल की यात्राओं में विदेश मंत्री सुश्री दुन्या मौमून (फरवरी 2015
एवं नवंबर 2015), तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री श्री अहमद जुहूर (अप्रैल 2015) और रक्षा
एवं राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री श्री ऐडम शरीफ उमर (जनवरी 2016 और फरवरी 2016) की शात्राएं
शामिल हैं। भारत और मालदीव ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों जैसे कि संयुक्त राष्ट्र, राष्ट्रमंडल,
गुट निरपेक्ष आंदोलन और सार्क में एक – दूसरे का निरंतर समर्थन किया है।
वर्तमान स्थिति
मालदीव ने हाल ही
में खुद को राजनयिक उथल-पुथल के बीच पाया है, जिससे गैर-राजनयिक टिप्पणियों, सैन्य
स्थिति और महत्त्वपूर्ण समझौतों को रद्द करने के माध्यम से भारत के साथ अपने संबंधों
को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। मालदीव ने भी चीन के साथ नए समझौतों पर हस्ताक्षर किये
हैं, जिससे भू-राजनीतिक परिदृश्य और जटिल हो गया है।
भारत और मालदीव संबंधों
से संबंधित प्रमुख बिंदु क्या हैं?
जब अंग्रेजों ने
द्वीपों का नियंत्रण छोड़ दिया था तब से भारत और मालदीव के बीच राजनयिक और राजनीतिक
संबंध वर्ष 1965 से रहे हैं। वर्ष 2008 में लोकतांत्रिक परिवर्तन के बाद से, भारत ने
मालदीव में राजनीतिक, सैन्य, व्यापार और नागरिक समाज के लोगों सहित विभिन्न हितधारकों
के साथ गहरे संबंध बनाने में वर्षों का निवेश किया है।
भारत के लिये मालदीव
का महत्त्व:
भारत के दक्षिण में
स्थित, मालदीव हिंद महासागर में अत्यधिक रणनीतिक महत्त्व रखता है, जो अरब सागर और उससे
आगे के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। इससे भारत को समुद्री यातायात की निगरानी
करने और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने की अनुमति मिलती है।
भारत और मालदीव के
बीच सदियों पुराना गहरा सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक संबंध है।12वीं शताब्दी के पूर्वार्ध
तक, बौद्ध धर्म मालदीव में प्रमुख धर्म था। वज्रयान बौद्ध धर्म का एक शिलालेख है, जो
प्राचीन काल में मालदीव में मौजूद था।
एक स्थिर और समृद्ध मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र
में शांति तथा सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली भारत की "नेबरहुड फर्स्ट" नीति
के अनुरूप है।
भारत चावल, मसालों,
फलों, सब्ज़ियों और दवाओं सहित रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं का एक महत्त्वपूर्ण आपूर्तिकर्त्ता
है। भारत सीमेंट और रॉक बोल्डर जैसी सामग्री प्रदान करके मालदीव के बुनियादी ढाँचे
के निर्माण में भी सहायता करता है।
भारत मालदीव के उन
छात्रों के लिये प्राथमिक शिक्षा प्रदाता के रूप में कार्य करता है जो भारतीय संस्थानों
में उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं, जिसमें योग्य छात्रों के लिये छात्रवृत्ति भी शामिल
है।
जब भी कोई संकट आया,
जैसे– सुनामी या पेयजल की कमी, भारत ने लगातार सहायता प्रदान की है। कोविड-19 महामारी
के दौरान आवश्यक वस्तुओं एवं समर्थन का प्रावधान एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत
की भूमिका को प्रदर्शित करता है।
हालिया घटनाक्रम:
इंडिया-आउट अभियान: हाल के वर्षों में मालदीव की राजनीति में "इंडिया
आउट" मंच पर केंद्रित एक अभियान देखा गया है, जिसमें भारतीय उपस्थिति को मालदीव
की संप्रभुता के लिये खतरा बताया गया है। अभियान के प्रमुख बिंदुओं में भारतीय सैन्य
कर्मियों की वापसी की मांग शामिल है। मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति ने भारतीय सैनिकों
की वापसी के लिये 15 मार्च, 2024 की समय-सीमा निर्धारित की है।
लक्षद्वीप द्वीप
की प्रचार यात्रा के बाद भारत के प्रधानमंत्री पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों से उत्पन्न
राजनयिक विवाद के कारण लक्षद्वीप का पर्यटन उद्योग गहन जाँच के दायरे में आ गया है।
परिणामस्वरूप, विवाद की प्रतिक्रिया के रूप में सोशल मीडिया पर मालदीव के बहिष्कार
का चलन चल रहा है।
मालदीव में चीनी
लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। मालदीव के रणनीतिक महत्त्व, भारत से निकटता एवं महत्त्वपूर्ण
समुद्री मार्गों के कारण चीन मालदीव के साथ अग्रगामी जुड़ाव में अधिक रुचि ले सकता
है। भारत इसे लेकर असहज है और साथ ही इससे क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा
छिड़ सकती है।
भारत-मलेशिया द्विपक्षीय
समुद्री अभ्यास समुद्र लक्ष्मण
फरवरी से 02 मार्च 24 तक विशाखापत्तनम में समुद्र लक्ष्मण अभ्यास चल रहा
है। भारतीय नौसेना का जहाज किल्टन और रॉयल मलेशियाई जहाज केडी लेकिर इस अभ्यास के तीसरे
संस्करण में भाग ले रहे हैं, जिसमें बंदरगाह पर पेशेवर बातचीत के बाद समुद्र में परिचालन
चरण शामिल है।
बंदरगाह पर दोनों जहाजों के चालक दल के बीच विभिन्न व्यावसायिक बातचीत,
आपसी हितों के विषयों पर विषय वस्तु विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, खेल कार्यक्रम और अन्य
बातचीत होगी। इन बातचीत का उद्देश्य ज्ञान के आधार को बढ़ाना, सर्वोत्तम प्रथाओं को
साझा करना और समुद्री पहलुओं पर सहयोग को आगे बढ़ाना है।
समुद्री चरण के दौरान, इकाइयाँ समुद्र में विभिन्न ऑपरेशनों का संचालन
करते हुए संयुक्त रूप से कौशल को निखारेंगी।
इस अभ्यास का उद्देश्य भारतीय और रॉयल मलेशियाई नौसेना के बीच संबंधों
को मजबूत करना और अंतर-संचालनशीलता को बढ़ाना है
|
. राजन, डी.एस. (2018) इंडिया एंड इट्स नेबरहुड: ए न्यू लुक एट स्ट्रैटेजिक
टाईज़ एंड पावर पॉलिटिक्स केडब्ल्यू पब्लिशर्स। (मालदीव सहित अपने पड़ोसी देशों के
साथ भारत के रणनीतिक संबंधों का विश्लेषण करता है। पृष्ठ संख्या 49 |
निष्कर्ष:
भारत मालदीव का एक
अग्रणी विकास साझेदार है तथा मालदीव की अनेक अग्रणी संस्थाओं की स्थापना की है जिसमें
इंदिरा गांधी स्मारक अस्पताल (आई जी एम एच), इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी संकाय (एफ ई
टी) तथा अतिथि सत्कार एवं पर्यटन अध्ययन संकाय (आई एम एफ एफ एच टी एस) शामिल हैं। जब
भी जरूरत पड़ी है, भारत ने मालदीव को सहायता की पेशकश की है। 26 दिसंबर, 2004 को मालदीव
के सुनामी से प्रभावित होने के बाद भारत पहला देश था जिसने मालदीव को शीघ्रता से राहत
एवं सहायता की पेशकश की। सुनामी एवं संबंधित कारकों की वजह से मालदीव की गंभीर वित्तीय
कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए भारत ने 10 करोड़ रूपए की बजटीय सहायता प्रदान की।
मई, 2007 में, ज्वार-भाटा से भंयकर रूप से प्रभावित होने के बाद, जुलाई, 2007 में सहायता
के लिए 100 मिलियन रूपए के समतुल्य अमरीकी डालर की सहायता प्रदान की गई। इस समय, भारत
ने मालदीव को 100 मिलियन अमरीकी डालर की स्टैंड बाई ऋण सुविधा (एस सी एफ) प्रदान की
है जिसमें व्यापार के लिए दीर्घावधिक ऋण तथा रिवाल्विंग ऋण शामिल हैं। मालदीव को भारत
सरकार द्वारा प्रस्तावित 40 मिलियन अमरीकी डालर मूल्य की नई ऋण सहायता के तहत भारत
के प्रवासी अवसंरचना गठबंधन (ओ आई ए) को मालदीव में 485 आवासीय यूनिटों के निर्माण
का ठेका दिया गया है। भारतीय स्टेट बैंक आइलैंड रिजॉर्ट को बढ़ावा देने, समुद्री उत्पादों
के निर्यात एवं कारोबारी उद्यमों के लिए ऋण सहायता प्रदान करके फरवरी, 1974 से मालदीव
के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भू मिका निभा रहा है। ताज ग्रुप ऑफ इंडिया मालदीव में
दो रिजॉर्ट चलाता है जिनके नाम ताज एक्जाटिका एंड स्पा तथा विवांता कोरल रीफ रिजॉर्ट
हैं। अनेक अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे कि टाटा हाउसिंग की भी मालदीव में मौजूदगी है।
एयर इंडिया तिरूवनंतपुरम, बंगलौर और चेन्नई से माले के लिए प्रतिदिन उड़ानों का संचालन
करता है; स्पाइस जेट ऑफ इंडिया माले एवं कोचीन के बीच प्रतिदिन उड़ानों का संचालन करता
है। आइलैंड एविएशन सर्विस (मालदीव एयरो) तिरूवंतपुरम और चेन्नई के लिए दैनिक उड़ानों
का संचालन कर रही है (सप्ताह में तीन बार)। हाल के वर्षों में हवाई संपर्क में सुधार
तथा लोकेशन से नजदीकी की वजह से व्यवसाय एवं पर्यटन के लिए मालदीव का दौरा करने वाले
भारतीयों (लगभग 45,000) की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। शिक्षा, चिकित्सा उपचार,
मनोरंजन एवं व्यवसाय के लिए मालदीव के लोगों के लिए भारत मनपसंद डेस्टिनेशन है। भारत
में उच्च अध्ययन / चिकित्सा उपचार के लिए दीर्घावधिक वीजा प्राप्त करने के इच्छुक मालदीव
के नागरिकों की संख्या में पिछले दो वर्षों में भारी वृद्धि हुई है। दोनों देशों के
बीच लंबा सांस्कृतिक संपर्क रहा है तथा इन संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए निरंतर
प्रयास किए जा रहे हैं। तीन ऐतिहासिक मस्जिदों (शुक्रवार मस्जिद तथा धारूमावंता रास्गेफानू
मस्जिद माले, फेंफुशी मस्जिद दक्षिण अरी अटोल) का जीर्णोद्धार एन आर एल सी सी पी, लखनऊ
के भारतीय विशेषज्ञों द्वारा सफलता के साथ किया गया। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक
मंडलियों का आदान प्रदान नियमित रूप से होता है। मालदीव में हिंदी की वाणिज्यिक फिल्में,
टीवी सीरियल तथा संगीत बहुत ही लोकप्रिय हैं। जुलाई, 2011 में, माले में स्थापित भारतीय
सांस्कृतिक केंद्र (आई सी सी) योग, शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य में नियमित पाठ्यक्रमों
का संचालन करता है। भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के कार्यक्रम मालदीव में सभी आयु के लोगों
में बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। मालदीव में भारतीय समुदाय दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय
है जिनकी संख्या 22 हजार के आसपास है। भारतीय प्रवासी समुदाय में मजदूरों के साथ साथ
डाक्टर, शिक्षक, लेखाकार, प्रबंधक, इंजीनियर, नर्स एवं तकनीशियन आदि जैसे पेशेवर भी
शामिल हैं जो अनेक द्वीपों में फैले हुए हैं। देश के तकरीबन 400 डाक्टरों में से
125 डाक्टर भारतीय हैं।। इसी तरह मालदीव में लगभग 25 प्रतिशत शिक्षक भारतीय हैं जो
अधिकतर मिडिल एवं वरिष्ठ स्तरों पर पढ़ाते हैं
2
जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री मोदी ने लक्षद्वीप की अपनी यात्रा को दर्शाते हुए एक
ट्वीट साझा किया, जिसमें उन्होंने इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थल के रूप
में इसकी क्षमता पर प्रकाश डाला। इस मासूम से दिखने वाले काम ने अनजाने में ही
तूफान खड़ा कर दिया।
मालदीव
के पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला महज़ूम मजीद और सांसद मरियम शिउना ने भारत द्वारा
लक्षद्वीप को मालदीव के आकर्षक पर्यटन उद्योग के प्रतिद्वंद्वी के रूप में बढ़ावा
दिए जाने पर निराशा व्यक्त की। मजीद के ट्वीट में भारत पर मालदीव को “लक्ष्यित”
करने का आरोप भी लगाया गया। अब्दुल्ला महज़ूम मजीद द्वारा अब हटाए गए ट्वीट में
लिखा गया है, “ जबकि मैं भारत के पर्यटन के लिए सफलता की कामना करता हूं, मालदीव
को इस तरह से स्पष्ट रूप से लक्षित करना कूटनीतिक नहीं है। भारत को समुद्र तट
पर्यटन में प्रतिस्पर्धा करने में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है,
यह देखते हुए कि हमारे रिसॉर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर उनके कुल द्वीपों से अधिक
है।दुर्भाग्य से, प्रधानमंत्री मोदी पर अपमानजनक टिप्पणियों के साथ यह चर्चा और
आगे बढ़ गई। हालांकि मालदीव सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर इन टिप्पणियों का समर्थन
नहीं किया गया, लेकिन भारत में इनसे काफी नाराजगी हुई। प्रधानमंत्री द्वारा
लक्षद्वीप की अपनी यात्रा की तस्वीरें पोस्ट करने के बाद एक्स पर अब हटाए जा चुके
पोस्ट में मरियम शिउना द्वारा हटाए गए ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी को “जोकर” और
“कठपुतली” कहा गया था।सोशल मीडिया विवाद ने भारत और मालदीव के बीच पहले से
मैत्रीपूर्ण संबंधों, उनके रणनीतिक सुरक्षा हितों और घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंधों को
प्रभावित किया है। आधिकारिक चैनलों ने चिंता व्यक्त की और मालदीव के अधिकारियों से
आपत्तिजनक भाषा के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह कियाहालांकि पर्यटन
प्रतिद्वंद्विता ने इसमें भूमिका निभाई, लेकिन इस घटना को व्यापक भू-राजनीतिक
संदर्भ से अलग नहीं किया जा सकता। मालदीव का हाल ही में चीन के साथ घनिष्ठ संबंधों
की ओर रुख अंतर्निहित तनाव का एक योगदान कारक हो सकता है।मालदीव सरकार ने सोशल
मीडिया पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने
के बाद तीन उप-मंत्रियों को निलंबित कर दिया है। मालदीव सरकार ने मामले की गंभीरता
को समझते हुए अपमानजनक टिप्पणी करने वाले तीन अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर
दिया। साथ ही, उन्होंने इस तरह के ऑनलाइन आचरण की निंदा की और भारत-मालदीव संबंधों
को मजबूत बनाए रखने के महत्व को दोहराया।
संदर्भ
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(2014) भारत की दक्षिण की ओर देखो नीति और मालदीव। नई दिल्ली: केडब्ल्यू पब्लिशर्स।
2. एम्मर्स, आर. (2010).
पूर्वी एशिया रूटलेज
में भूराजनीति और समुद्री क्षेत्रीय विवाद। (इसमें भारत की समुद्री रणनीति और मालदीव
के लिए इसके निहितार्थ पर अनुभाग शामिल हैं।
3. पंत, एच. वी. (2019)। भारत और विश्व:
भारतीय राजनयिकों की नज़र से नई दिल्ली: हार्पर
कॉलिन्स इंडिया। (इसमें मालदीव के साथ भारत के राजनयिक संबंधों पर चर्चा शामिल है।
4. पुरूषोतमन, यू. (2013)। दक्षिण एशिया
में भारत: नेहरू से लेकर भाजपा रूटलेज तक घरेलू पहचान की राजनीति और विदेश नीति (मालदीव
सहित अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के प्रति भारत की विदेश नीति को शामिल करता है।)
5. रमेश, जे. (2006).
मेकिंग सेंस ऑफ
चिंदिया: रिफ्लेक्शन्स ऑन चाइना एंड इंडिया। नई दिल्ली: इंडिया रिसर्च प्रेस. (जबकि
मुख्य रूप से चीन और भारत पर केंद्रित, इसमें मालदीव से
जुड़ी क्षेत्रीय गतिशीलता की अंतर्दृष्टि शामिल है।
6. राजन, डी.एस. (2018)
इंडिया एंड इट्स
नेबरहुड: ए न्यू लुक एट स्ट्रैटेजिक टाईज़ एंड पावर पॉलिटिक्स केडब्ल्यू पब्लिशर्स।
(मालदीव सहित अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों का विश्लेषण करता है।






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